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बच्चों को है मोबाइल की लत तो मत हों परेशान, कराएं ये काम तो छूट जाएगी आदत….!!

भोपाल – लगभग हर घर की समस्या बन चुकी बच्चों की मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए भोपाल की बाल कल्याण समिति ने कुछ प्रयास किए हैं, जिसमें उन्हें सफलता भी मिली है। बच्चों के मोबाइल पर दिनभर गेम खेलने और चैटिंग करने से परेशान होकर अभिभावक बाल कल्याण समिति(सीडब्ल्यूसी) के पास पहुंच रहे हैं। अभिभावकों ने अपने बच्चों को चाइल्ड लाइन में रखकर उनके मोबाइल की लत को छुड़ाने की गुहार लगाई। सीडब्ल्यूसी ने ऐसे बच्चों को कुछ दिन चाइल्ड लाइन में रखा और उनसे मोबाइल से दूर क्रिएटिव काम करवाए गए। इसका सकारात्मक रिजल्ट सामने आया और बच्चों ने मोबाइल से दूरी बना ली।

पांच महीने में 20 बच्चे घर से भागे

बाल कल्याण समिति के पास पिछले पांच महीने में 20 से अधिक ऐसे मामले आए, जिसमें मोबाइल नहीं मिलने की वजह से बच्चे इतने नाराज हो गए कि वे घर से भाग गए। पिछले महीने ही एक छात्रा से उसकी मां ने मोबाइल छुड़ाया था तो उसने बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।

केस- 1

रविशंकर नगर निवासी दसवीं का छात्र मोबाइल एडिक्ट हो गया था। उसके अभिभावक उसे पढ़ने के लिए कहते, लेकिन वह मोबाइल पर ही लगा रहता था। अभिभावक के डांट से परेशान होकर उसने किताब को काटकर मोबाइल को उसमें सेट कर दिया। जब छमाही परीक्षा में फेल हुआ तो मामला सामने आया। अभिभावक ने उसे सीडब्ल्यूसी लेकर आए। तब समिति ने उसे चाइल्ड लाइन में पांच दिन रखकर सक्सेस स्टोरी लिखवाई। तब उसकी आदत छूटी और दसवीं बोर्ड में उसके 70 फीसदी से अधिक अंक आए।

केस- 2

बैरागढ़ निवासी ग्यारहवीं का छात्र मोबाइल का इतना एडिक्ट हो गया कि उसने भोजन और पढ़ाई करना बिल्कुल छोड़ दिया। अभिभावक समिति के पास बेटे को लेकर आए। तब उसे 5 दिन तक चाइल्ड लाइन में रखकर वहां की कार्यप्रणाली को समझने के लिए कहा गया। उसे हर रोज पांच पेज लिखवाए गए। छात्र को समझ में आ गया कि पढ़ाई और घर के सिवाय कुछ भी नहीं है।

केस- 3

लखनऊ से भागकर भोपाल पहुंचे 16 वर्षीय छात्र की जब काउंसिलिंग की गई तो पता चला की वह पबजी गेम खेलने का एडिक्ट हो गया था और वह दोस्त के कहने पर टास्क पूरा करने के लिए घर से भाग गया। समिति ने इसे तीन दिन तक स्टोरी लिखवाई और प्रोत्साहित करने वाली किताबें पढ़ने के लिए दी। इसके बाद छात्र को लखनऊ समिति को सौंप दिया।

केस-4

कोपरगांव से भागकर भोपाल रेलवे स्टेशन पर चाइल्ड लाइन को एक 13 वर्षीय बालक मिला। उसने बताया कि वह अभिभावक के साथ जाना नहीं चाहता है। वे उसे मोबाइल में गेम खेलने नहीं देते। वहीं अभिभावकों ने कहा कि बेटा 8वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है, उसने छमाही परीक्षा में कॉपी में कुछ नहीं लिखा था, जिससे स्कूल से शिकायत मिली थी। जिसे लेकर जब बेटे को मोबाइल से नहीं खेलने के लिए डांटा तो वह घर छोड़कर भाग गया। छात्र को उसके पसंद की कहानियों की किताबें पढ़ने के लिए दी गई और पेंटिंग कराई गई। इससे उसकी मोबाइल की लत छूट गई।

इनका कहना है

आजकल समिति के पास बच्चों के मोबाइल एडिक्शन के मामले अधिक आ रहे हैं। बच्चों में मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए चाइल्ड लाइन में चार से पांच दिन रखकर उनसे खुद की सक्सेस स्टोरी लिखवाई जाती है या ऐसे काम करवाए जाते हैं जो उन्हें पसंद हों।

कृपाशंकर चौबे, सदस्य, सीडब्ल्यूसी

काउंसलर्स बोले, ऐसे छुड़ाएं मोबाइल की लत

– बच्चों को स्टोरी लिखने के लिए दें।

– उन्हें पेंटिंग या कहानियों की किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें।

– आउटडोर गेम्स में रूचि बढ़ाएं, खुद भी साथ खेलें।

– मोबाइल या टीवी ज्यादा देखने से होने वाले नुकसान के बारे में बताएं।

– बच्चों को स्पोर्ट्स क्लब ज्वॉइन कराएं।

– उन्हें कभी भी अकेला नहीं छोड़े।

– बच्चों को मैदानी खेलों से जोड़ें।

– शतरंज या लूडो जैसे गेम खिलाएं।

इनका कहना है

आजकल बच्चों का गैजेट्स के प्रति लगाव बढ़ता जा रहा है। यह एक प्रकार की मानसिक बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे मानसिक बीमारी माना है। इससे बचाने के लिए अभिभावकों को क्वालिटी टाइम देना होगा।

-डॉ राहुल शर्मा, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट

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