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बगैर लाइसेंस चल रहे 53 डायग्नोस्टिक सेंटर, 25 फीसदी तो सरकार डॉक्टरों के…..!!

भिलाई – बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभाने वाले जिले के 53 डाइग्नोस्टिक व पैथालॉजी सेंटर बगैर लाइसेंस के चल रह है। नर्सिंग होम एक्ट के मानकों को पूरा नहीं करने के कारण प्रशासन ने इन्हें लाइसेंस तो नहीं दिया, लेकिन जांच करने की छूट दे रखी है। इन सेंटरों पर डिग्रीधारी डॉक्टर हैं या नहीं, ट्रेंड स्टॉफ है या नहीं, इसकी जांच नहीं की जा रही है। अनट्रेंड कर्मचारियों से मरीजों की जांच कराने से लेकर उनको बेवजह रेडिएशन देने यह खेल 2013 से चल रहा है। इससे लोगों का सही ढंग से इलाज नहीं हो पा रहा। साथ ही उन्हें कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा भी बना रहता है। इधर नर्सिंग होम एक्ट के नाम पर जिम्मेदारों की जांच-पड़ताल सिर्फ नोटिस देने तक ही सीमित रह जाती है।
हैरानी वाली बात यह कि बगैर लाइसेंस के इन 53 डाइग्नोस्टिक एवं पैथालॉजी सेंटरों में 25 फीसदी, सरकारी डॉक्टरों द्वारा चलाया जा रहा है। यही नहीं इन 53 सेंटरों में काम करने वाले कुछ सरकारी डॉक्टर ऐसे हैं, जिनकी पोस्टिंग पड़ोसी या दूर के जिलों में है। एक ही डॉक्टर की परमिशन से तीन-तीन डाइग्नोस्टिक और पैथालॉजी सेंटर चल रहे। कुछ पैथॉलाजी संचालकों का कहना है कि उन्होंने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।
सबकी मिलीभगत : जिम्मेदारों को मैनेज कर चल रहा है खेल
इन कानूनों का हाे रहा उल्लंघन
एटॉमिक एनर्जी एक्ट (रेडिएशन से बचाने के लिए)
पीएनडीटी एक्ट 1994 (लिंग जांच करने से मनाही)
बायो मेडिकल वेस्ट रूल (बायो-वेस्ट निष्पादन के लिए)
लोकल कानून (फायर व निगम के अपने लोकल कानून)
जानिए, इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार…
कलेक्टर दुर्ग (समीक्षा बैठकों में इसपर ध्यान नहीं दिया)
सीएमएचओ, दुर्ग (नोटिस देकर जिम्मेदारियों पूरी की)
प्रभारी नर्सिंग होम एक्ट (नहीं दिया कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन)
पॉल्यूशन कंट्रोल डिपार्टमेंट (पर्यावरण संरक्षण को हासिए पर रखा)

बगैर लाइसेंस चल रहे 53 डाइग्नोस्टिक सेंटर, 25 फीसदी तो सरकारी डॉक्टरों के
लाइसेंस नहीं होने के कारण न तो इनकी जांच हो रही और न ही कार्रवाई।
बगैर लाइसेंस डाइग्नोस्टिक सेंटर चलने से आम व्यक्ति को क्या नुकसान, इसे इन 4 बिंदुओं से समझिए..
इलाज में परेशानी :- बगैर लाइसेंस के जो पैथालॉजी सेंटर संचालित हैं, उनमें ज्यादातर में परमानेंट योग्य डॉक्टर या ट्रेंड स्टॉफ नहीं रहते। इससे जांच की रिपोर्ट गलत आने की पूरी संभावना रहती है। चूंकि, इसी रिपोर्ट को देखकर डॉक्टर इलाज करते हैं, इसलिए इलाज में परेशानी होती है।
संक्रामक बीमारियाें का खतरा:- ऐसे डाइग्नोस्टिक सेंटर बायोमेडिकल वेस्ट का सही से निष्पादन नहीं करते हैं। उनके द्वारा ईटीपी नहीं लगाने के कारण खून, मल-मूत्र सीधे आस-पास की नालियों में बहा दिया जाता है। इससे बीमारियों का खतरा बढ़ा है।
कैंसर की संभावना :-
इस तरह के ज्यादातर डाइग्नोस्टिक सेंटर एईआरबी के तय मानकों के अनुसार लोगों को एक्स-रे की विकिरण से सुरक्षा की व्यवस्था नहीं करते हैं। इसका पालन नहीं करने से जांच के लिए पहुंचने वाले मरीज भी एक्स-रे के रेडिएशन में आ जाते हैं।
भ्रूण जांच को बढ़ावा :- बगैर लाइसेंस डाइग्नोस्टिक सेंटर चलने से पीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन की पूरी संभावना रहती है। क्योंकि लाइसेंस नहीं होने से मामला फंसने पर सेंटर संचालक, भ्रूण जांच करने से मुकर जाते हैं। चूंकि उनका लाइसेंस नहीं होता है, इसलिए उन पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।
 - |अंकित आनंद, कलेक्टर
नोटिस देकर पक्ष जानेंगे, कार्रवाई होगी
जिले में 53 डाइग्नोस्टिक एवं पैथालॉजी सेंटर बिना लाइसेंस कैसे चल रहे?

पूर्व में सभी सेंटरों को नोटिस दी गई है। मैं पुन: उन्हें नोटिस देकर उनको तलब करता हूं। मानकों का अनुपालन नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी।
इनमें तो कई सेंटर सरकारी डॉक्टर चला रहे हैं, ये कैसे?

 उन डॉक्टरों को भी नोटिस दी जाएगी। सबके पक्ष लिए जाएंगे। कार्रवाई करेंगे।
हर मामले में कार्रवाई की बात कही जाती है। होता कुछ नहीं, इसमें क्या होगा?

आप जिन 53 सेंटरों की बात कर रहे हैं, उनके सूची मेरे पास नहीं है। मैं सीएमएचओ से मागूंगा। उसके बाद ही मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं।
एक्ट के पालन में लापरवाही, खुली पोल
स्वास्थ्य विभाग से हो रही चूक
सभी डॉक्टर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य हैं। हम हर मीटिंग में सबको कायदे-कानून का पालन करने की सलाह देते हैं। डाइग्नोस्टिक एवं पैथालॉजी सेंटरों पर नियमों का अनुपालन कराना स्वास्थ्य विभाग का काम है। उनके स्तर से चूक की जा रही है।
– डॉ. अर्चना चौहान, अध्यक्ष, आईएमए
एनओसी दे दी, स्वास्थ्य विभाग से देरी
हमारे पास समय-समय पर जितने भी आवेदन आए, हमने जांच के बाद उन सबको एनओसी दे दी है। जिनके यहां मानकों के अनुरूप व्यवस्था नहीं मिली, उन्हें दुरुस्त करने का समय दिया है। कुछ के ही प्रार्थना पत्र हमारे यहां लंबित है। 53 में से ज्यादातर को हमने एनओसी दी है।
– उज्ज्वल कुमार मंडल, पॉल्यूशन कंट्रोल डिपार्टमेंट

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