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छत्तीसगढ़ के ‘बाबूजी’ जो कभी नामी पत्रकार थे आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, जानिए उनके बारे में ये अहम बातें….!!

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद मोतीलाल वोरा को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनाने की चर्चा है. हालांकि खुद मोतीलाल वोरा ने इसका खंडन किया है ! उन्होंने कहा कि मुझे तो कोई जानकारी नहीं है, वर्किंग कमेटी की बैठक में ही सारा निर्णय होता है, जो जनरल सेक्रेटरी है वो ही कह सकते हैं. कांग्रेस के कॉन्स्टीट्यूशन के हिसाब से भी कांग्रेस प्रेसिडेंट का निर्णय भी वर्किंग कमेटी की बैठक में ही होता है !

बहरहाल, व्यावसायी से पत्रकार और पत्रकार से नेता बने मोतीलाल वोरा एक समय छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ट्रांसपोर्ट कंपनी चलाते थे. मोतीलाल वोरा अपने समय के नामी पत्रकार भी रहे. जानते हैं मोतीलाल वोरा से जुड़ी खास बातें !

ऐसा रहा बाबूजी का रणनीतिक जीवन 

मोतीलाल वोरा ने राजनीतिक जीवन  की शुरआत पार्षद पद से की थी। उसके बाद विधायक चुने गए। विधायक के बाद अविभाजित मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा मंत्री बने। इसके बाद दो मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 9 मार्च, 1985 को अर्जुन सिंह ने अपने नेतृत्व में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद दोबारा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के कुछ दिन बाद नए मुख्यमंत्री के रूप में छत्तीसगढ़ के दुर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले मोतीलाल वोरा को जिम्मेदारी दी गई ! इसके बाद केन्द्रीय नेतृत्व ने उन्हें देश के सबसे राज्य उत्तरप्रदेश का राज्यपाल भी बनाया। पार्टी के सबसे पुराने और गांधी परिवार के सबसे करीबी व वफादार नेता में मोतीलाल वोरा ने लगभग 20 वर्षों तक पार्टी के कोषाध्यक्ष की भी अहम् जिम्मेदारी संभाली !

मोतीलाल वोरा को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस के कार्यकर्ता और पदाधिकारी उन्हें अध्यक्ष बनाए की घोषणा के बाद से एक दूसरे को बधाई देते रहे। पार्टी कार्यकर्ता शुभकामनाएं दिए जा रहे हैं। बधाई देने वालों में भिलाई विधायक महापौर देवेन्द्र यादव, पूर्व विधायक भजन सिंह निरंकारी, पूर्व विधायक बी.डी.कुरैशी, साडा के पूर्व उपाध्यक्ष बृजमोहन सिंह, उद्योगपति व वरिष्ठ काँंग्रेसी के.के.झा, महेश जायसवाल, धर्मेन्द्र यादव,अतुल साहू, श्रीमती तुलसी साहू, पूर्व महापौर सुश्री नीता लोधी, अमीरचंद अरोरा, लल्लन दुबे, सीजू एंथोनी, नीरज पाल, लक्ष्मीपति राजू, अरूण सिसोदिया, संदीप निरंकारी, सुनील चौधरी, श्रीमती सुभद्रा सिंह, मंगा सिंह, उमेश सिंह, ज्ञानचंद जैन, मोहनलाल गुप्ता, वाई.के. सिंह, विनोद उपाध्याय, युवक काँग्रेस के प्रदेश सचिव अमित उपाध्याय, एनएसयुआई के महासचिव सुमीत पवार, भिलाई अध्यक्ष आदित्य सिंह, शरद मिश्रा, सहित अनेक कांँग्रेसी शामिल हैं।

 

 मोतीलाल वोरा की शख्सियत 
मोतीलाल वोरा का जन्म राजस्थान के नागौर जिले में 20 दिसम्बर, 1928 में हुआ था. इसके बाद उनका परिवार तब के मध्यप्रदेश वर्तमान में छत्तीसगढ़ शिफ्ट हो गया. मोतीलाल वोरा ने रायपुर और कलकत्ता से शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने कई वर्षो तक पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए कई समाचार पत्रों का प्रतिनिधित्व किया. साल 1968 में राजनीतिक क्षितिज पर वे उभर कर आये. कांग्रेस ज्वाइन किया और 1972 में उन्हें मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में दुर्ग सीट से जीत मिली और मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के उपाध्यक्ष नियुक्त हुए. इसके बाद 1977 और 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव में जीत मिली.

उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं वोरा

सन् 1980 में अर्जुन सिंह मंत्रिमण्डल में उन्हें उच्च शिक्षा विभाग का दायित्व सौंपा गया. ये 1983 में कैबिनेट मंत्री हुए. इसके बाद वे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नियुक्ति हुए. 13 मार्च, 1985 को मोतीलाल वोरा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद 13 फ़रवरी, 1988 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से त्याग पत्र देकर 14 फ़रवरी, 1988 में केन्द्र में स्वास्थ्य परिवार कल्याण और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण किया.

1988 में पहली बार बने राज्यसभा सांसद
मोतीलाल वोरा अप्रैल 1988 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिये चुने गये. 26 मई, 1993 से 3 मई, 1996 तक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के पद पर आसीन रहे. साल 1998-99 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतारा, लेकिन बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. रमन सिंह से वे चुनाव हार गए.

लंबे समय तक रहे कांग्रेस के कोषाध्यक्ष
लोकसभा चुनाव हारने के बाद 2002 में कांग्रेस कोटे की सीट से मोतीलाल वोरा राज्यसभा में लाए गए. इसके बाद पार्टी ने उन्हें संगठन का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया. मोतीलाल वोरा को 2018 में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले इस पद से मुक्त कर दिया गया. अब पार्टी ने उन्हें अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है.

बाबूजी के नाम से प्रसिद्ध 
संगठन और सत्ता में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले 91 वर्षीय मोतीलाल वोरा को छत्तीसगढ़ की वर्तमान राजनीति में बाबूजी के नाम से जाना जाता है. वोरा लगभग दो दशक पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे. अब भी वे गांधी परिवार के खास माने जाते हैं. इतने लंबे सांगठनिक कार्यकाल के दौरान वोरा ने अपने बेटे अरुण वोरा को अपनी राजनितिक विरासत देने की कोशिश की ! लेकिन 1993 में जीत के बाद लगातार तीन विधानसभा चुनाव में अरुण वोरा हारे, मगर 2013 में फिर बाबु जी की बदौलत टिकट मिला और इस बार चुनाव जीतने में वह सफल रहे. इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें जीत मिली ! वे भी अपने पिता मोतीलाल वोरा को बाबूजी ही कहते हैं !

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