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रायपुर – कांग्रेस कई स्तर पर सर्वे के बाद पार्षदों का टिकट काटेगी या बचाएगी…..!!

रायपुर – नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस कई स्तर पर सर्वे कराने के बाद सीटिंग पार्षदों का टिकट काटेगी या बचाएगी। पार्टी के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने संगठन को स्पष्ट कहा है कि नगरीय निकाय चुनाव में ऐसे प्रत्याशी उतारे जाएं, जो जिताऊ हों। चेहरा बदलना होगा, तो उस पर भी संगठन कड़े फैसले लेने के लिए तैयार रहेगा। प्रदेश प्रभारी के निर्देश के बाद प्रत्याशियों के चयन के फॉर्मूले पर विचार शुरू हो गया है। प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता है, इसलिए नगरीय निकायों में अधिकाधिक महापौर, अध्यक्ष और पार्षदों की सीटों पर कब्जा करके अपना दम दिखने की चुनौती है। कांग्रेस के लिए अभी चिंता का यही विषय है कि सत्ता में होने के बावजूद संगठनात्मक रूप से कमजोर हो गई है। लोकसभा चुनाव की हार का मंथन करने पर यह निष्कर्ष पार्टी के आलानेताओं ने खुद निकाला है। इस कारण नगरीय निकाय चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने के दिशा में काम किया जाएगा। अब भी 20 फीसद बूथ स्तर पर कमेटियां नहीं बन पाई है। इसके अलावा पार्टी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और दूसरे दलों को मिले वोटों की कुंडली तैयार करेगी। इससे यह पता चलेगा कि किस वार्ड में कांग्रेस कमजोर और कहां मजबूत है। इससे दोनों चुनाव में पार्टी के वर्तमान पार्षदों की सक्रियता या योगदान का भी पता चलेगा। पार्षदों को भी अपनी रिपोर्ट देने को मौका दिया जाएगा। उन्होंने पांच साल के कार्यकाल में वार्ड में क्या काम कराए? इसके बाद संगठन पार्षदों का परफॉर्मेंस चेक करने के लिए ब्लॉक और जिला कमेटियों से अलग-अलग रिपोर्ट लेगा। ब्लॉक और जिला कमेटियों को वार्ड की जनता से बात करने के बाद पार्षद की रिपोर्ट बनानी होगी। वैसे पार्टी के नेताओं का कहना है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तरह कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव में भी सभी तो नहीं, लेकिन बहुत से नए चेहरे उतारेगी।

भाजपा-कांग्रेस के पास छह-छह नगर निगम वर्ष 2014 के नगरीय निकाय चुनाव में 13 नगर निगम में से पांच रायपुर, भिलाई, अंबिकापुर, कोरबा और जगदलपुर में कांग्रेस और छह बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी, राजनांदगांव, बीरगांव, भिलाई-चरौदा में भाजपा के महापौर जीत थे। रायगढ़ और चिरमिरी में निर्दलीय महापौर चुने गए थे। हालांकि, अब चिरमिरी के महापौर ने कांग्रेस में वापसी कर ली है, तो अभी कांग्रेस के पास भी छह महापौर की कुर्सियां हैं।

चुनाव से पहले काम दिखाना होगा

प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता है, इसलिए नगरीय निकाय चुनाव के लिए आचार संहिता लगने से पहले निकाय क्षेत्रों में काम करके दिखाना होगा। पेंडिंग योजनाओं और कामों को पूरा करने की चुनौती होगी। नए काम भी कराने होंगे। ऐसा करके कांग्रेस और उसकी सरकार यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि सत्ताधारी दल के प्रत्याशी को चुनने ने न केवल शहर, बल्कि वाड़ का भी भला होगा।

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