Friday , July 19 2019
Breaking News
Home / राष्ट्रबोध विशेष / राष्ट्रबोध आलेख : मोदी की पुनर्स्थापना और कांग्रेस की भयानक असफलता का सच,यह लेख हर भारतीय को सोचने को मजबूर कर देगा…!!

राष्ट्रबोध आलेख : मोदी की पुनर्स्थापना और कांग्रेस की भयानक असफलता का सच,यह लेख हर भारतीय को सोचने को मजबूर कर देगा…!!

राष्ट्रबोध विशेष –  कुछ दिनों से टी वी पर कुछ बुद्धिमान पत्रकार भारतीय जनता पार्टी की इस अभूतपूर्व विजय के कारणों को समझ नहीं पा रहे है, और भाजपा की इस जीत के पीछे में छुपी सोशल इंजीनियरिग की खोज में लगे हुए है। लेकिन देखा जाए तो इस बार का चुनाव सबसे सरल था जिसका मूल देशप्रेम और राष्ट्रवाद आधार बनाया गया था। इसीलिए इस चुनाव ने जाति, धर्म की गोटियों से खेलने वाले नेताओं को चकरा कर रख दिया है।
चीन में बांस की जाति का एक पौधा होता है। जिसे उगाने के लिए उसकी कलम को तीन साल तक भूमि में दबाकर रखा जाता है, जीवित रखने के लिए उसे कभी-कभी पानी दिया जाता है। लेकिन जब वह उगना शुरू होता है तो तीन फुट रोज बढ़ता है और पूरी ऊँचाई प्राप्त करके ही रुकता है। इस जीत के पीछे के अदृश्य कारण कुछ ऐसे ही है।
2014 के चुनाव में जब नरेन्द्र मोदी की सरकार बनी थी तो अमेरिका के ‘वाशिंगटन पोस्ट’ अख़बार में एक छोटे से शीर्षक के साथ एक लेख छपा था, ‘भारत में पहली बार भारतीयों की सरकार बनी है।’ कहना न होगा आजादी के बाद अब तक देश पर यूरोपियन प्रभुत्व वाली सरकारें रही है…उससे पहले अंग्रेज थे और उनसे पहले मुस्लिम आक्रांता। विदेशी बुद्धिजीवी इस बात को समझते है कि सदियों से बलात दमन करके रखी गई किसी संस्कृति को जब मुखर होने का अवसर मिलता है तो ऐसा ही होता है।
नरेंद्र मोदी पहले शुद्ध भारतीय विचारधारा वाले प्रधान मंत्री है। जिन्हें प्रधानमंत्री बनते ही अपने लोगो का दुःख-दर्द दिखाई देने लगा था। उन्होंने आते ही घर-घर शौचालय योजना शुरू की थी। वे जानते थे कि खुले में शौच जाने पर व्यक्ति को कितनी शर्म आती है। किसी सरकार द्वारा पहली बार निर्धनों, दलितों, वंचितों की महिलाओं के खुले में शौच जाने पर आने वाली शर्म को अनुभव किया गया। उस दर्द को समझा गया जो महिलाएँ महाशंका जैसी अनैच्छिक क्रिया को बल पूर्वक अंधकार होने तक रोके रखती थी। अतः मोदी जी ने सर्वप्रथम घर-घर शौचालय का बीड़ा उठाया और इस योजना को सफल बनाया। पूर्व की सरकारों के लिए यह एक नाक-भौं सिकोड़ने की योजना मात्र रही होगी लेकिन यह सच में देश के दरिद्र-नारायणों को एक प्रकार का सम्मान था जिसे उच्च या मध्यवर्गी कभी नहीं समझ सकते। इसी प्रकार उज्वला योजना में गैस का चूल्हा और सिलेंडर देकर उन्हें धुँए से बचाना, हर दुर्बल का बैंक अकाउंट खुलवाना, अतिपिछड़ों को मकान देना…ये ऐसी ठोस योजनाएँ थी जिसकी कल्पना वे बेचारे कभी नहीं कर सकते थे। यें सीधे उनके हृदय तक पहुँची। किसी को आत्महीनता के बोध से उठाकर आत्मसम्मान की स्तिथि में पहुँचाना महान कार्यो की श्रेणी में आता है। साथ ही इन सब योजनाओं पर मोदी जी की कड़ी नजर थी क्योंकि वे देश की लालफीताशाही से परिचित थे जो हर योजना को कागजों में बदलने में माहिर होते है।
उनका दूसरा बड़ा फैंसला था नोटबन्दी। अचानक नोटबन्दी क्यों की गई थी, इसके पीछे के असली कारणों को जानकर आप डर जाएँगे। वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान सी बी आई ने भारत, नेपाल सीमा पर विभिन्न बैंकों की करीब 70 शाखाओ पर छापेमारी की, तो उन्हें बड़ी मात्रा में नकली भारतीय करेंसी मिली। पूछताछ में उन बैंक शाखाओं के अधिकारियों ने बताया कि जो नोट आपने छापें में बरामद किये हैं वे तो हमें भारतीय रिजर्व बैंक से ही मिले हैं। यह एक बेहद गंभीर खुलासा था इसके अनुसार रिजर्व बैंक भी नकली नोटों के खेल में लिप्त लग रहा था! ध्यान रहे उस समय वित्तमंत्री पी चितम्बरम थे।
सी बी आई ने तुरंत भारतीय रिजर्व बैंक के तहखानो में छापेमारी की जहाँ भारी मात्रा में 500 और 1000 रुपये के जाली नोट मिले। हैरानी की बात यह थी जो जाली मुद्रा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई एस आई भारत में तस्करी करके भेज रही थी यह उसी पैटर्न की छपी हुई थी। लेकिन सी बी आई समझ नहीं पा रही थी कि यह जाली करेंसी भारतीय रिजर्व बैंक के तहखानो में कैसे पहुँची? यह खेल 2004 से ही शुरू हो गया था।
इससे अंदाज लगाया जा सकता है कांग्रेस राज में पाकिस्तान की इकोनॉमी भी भारत से चल रही थी। आतंकवादी भी उसी पैसे से आतंक फैला रहे थे। आज पाकिस्तान की भारत से रिश्ते सुधारने और फिर व्यापार शुरू करने की जो छटपटाहट है उसका राज यही है। भारत की करेंसी के बिना वह जीवित नही रह सकता। आज पाकिस्तान से एक भी ट्रक बार्डर पार नहीं कर रहा है अतः वह व्यापार करने के लिए बैचेन है। लेकिन वह, बंग्लादेश बार्डर हवाई रास्तो और दूसरे तरीकों से अपना काम जारी रखे हुए है। करतारपुर कॉरिडोर का खुलना भी उसी कड़ी का हिस्सा है। कितनी विचित्र बात है कांग्रेस राज में आई एस आई के अफसर सीधे सोनिया गांधी से जाकर मिलते थे। कुछ दिन पहले सुब्रह्णयम स्वामी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि प्रियंका गांधी की शादी में पार्टी अरेंजमेंट जिन दो महिलाओं ने किया था वे आई एस आई की थी।
नोट बंदी का दूसरा कारण कालाबाजारी थी। नोट बंदी से पहले कुछ लोगो के पास इतना काला धन जमा हो गया था कि उनके पास बाजार को प्रभावित करने की शक्ति आ गई थी। उदाहरण के लिए कोई व्यापारी मंडी में एक साथ एक हज़ार करोड़ रूपये की दाल खरीदरकर एक माह के लिए रोक देता था। बाजार में हाहाकार मचने पर उसे बारह सौ करोड़ में बेच देता। वह तो एक झटके में दो सौ करोड़ कमा लेता था लेकिन जनता के लिए हर किलो पर चालीस रूपये बढ़ जाते थे। यह खेल मोदी सरकार तक चला। इसी खेल से सोने की कीमतें जो अटल जी के राज तक पाँच हजार तक रही अगले दस सालों में बत्तीस हजार तक हो गई थी। नोटबंदी इन दोनों समस्याओं को समाप्त करने का एक मात्र उपाय थी। नोटबंदी होते ही उन लोगो का पैसा बेकार हो गया। तुरंत दालों और दूसरे खाद्यपदार्थों के दाम स्थिर हो गए थे जो अब तक है।
एक और बात, आजादी के बाद से अटल बिहारी की सरकार तक यानि साथ सालों में कम्पनियों द्वारा बैंकों से 18 लाख करोड़ NPA कर्ज लिया गया था जो मनमोहन सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल में बढ़कर 52 लाख करोड़ हो गया था। यानि 34 लाख करोड़ केवल मनमोहन के कार्यकाल में बांटे गये। यदि आर बी आई के गवर्नर रघुराजन बैंकों से लोन देने को मना करते तो उन्हें चुप रहने को कहा जाता था। इस विराट रकम ने बैंक खोखले कर दिए थे। यह तो सब जानते है कि मनमोहन काल में सारे फैंसले सोनिया गांधी, राहुल, प्रियंका ही लेते थे।
मोदी सरकार ने आते ही बैंकों के कड़े कानून बनाए और पैसा वसूलना शुरू किया। लेकिन कानून पेंचीदगियों के चलते अभी तक 3 लाख करोड़ ही वसूला गया है। कुछ बाहर भागे हुए है उनका सोचना था कि फिर कांग्रेस सरकार आएगी, लेकिन उन्हें अब लौटना होगा। इसके अतिरिक्त उस समय मनमोहन सरकार ने देश के संसाधनों को जिस तरह घोटालों के साथ बेचा यह सर्वविदित है। ऐसा लगता है कि कहीं से इस देश को बर्बाद करने के लिखित निर्देश सरकार को दिए जा रहे थे।
पिछले साठ सालों में देश की हर वैज्ञानिक प्रगति को रोका गया। बहुत कम लोग जानते है कि आजादी के बाद अब तक हमारे 193 परमाणु ऊर्जा से जुड़े उच्चकोटि के भौतिक वैज्ञानिकों को मारा जा चुका है। इन वर्षों में देश में सी आई ए, के जी बी, एम आई फाइव पूरी की पहुँच हर जगह थी। सब ने ठान रखा था कि किसी भी तरह यह देश आगे न बढ़ सके। पूर्व सरकारे उनका सहयोग करती लग रही थी क्योंकि सारे मामले दबा दिये जाते थे। गुजराल और मोरारजी देसाई काल में तो पाकिस्तान में काम कर रहे हमारे सारे जासूसों के पते पाकिस्तान सरकार को बता दिए थे। आई एस आई ने सब को चुन-चुन कर मार दिया। अजीत डोभाल ने बड़ी महनत से फिर ख़ुफ़िया तंत्र को दुबारा खड़ा किया है।
इसी प्रकार पिछले 60 वर्षों में में कोई भी रक्षा सौदा बिना दलाली के नहीं हुआ। कई बार दलाली का पैसा सेट करने और उसके लेने के तरीका सोचते-सोचते सालों बीत जाते थे, जब तक वह हथियार सेना मिलता उसकी टेक्नोलॉजी पुरानी हो चुकी होती थी। इन सब बातों पर विचार करे तो ऐसा लगता था जैसे कोई माँ सौतेले बच्चे को पालती है, कभी उसे खाना दे देती है तो कभी नहीं। और लम्बे समय तक ऐसा होने से वह कुपोषित और अतिदुर्बल होकर जाता है।
लेकिन 2014 में नरेंद्र मोदी ने जब पदभार संभाला तो उन्हें देश की आंतरिक हालत के जर्जर होने का पता चला। वे इसके कारणों पर नहीं गये और न ही किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी नही निकाली अपितु चीजो को ठीक करने में जी जान से जुट गये। देश की जर्जर अर्थव्यवस्था के हर रुग्ण दाँत को उखाड़ फेंका और हराम का पैसा खाने वालों के सारे रास्ते बंद किये।
इसके अलावा उन्होंने विकास में रोड़ा बनने वाले लगभग 1500 व्यर्थ के कानूनों को समाप्त किया। जी एस टी लाकर सभी प्रदेशो में कर प्रणाली को एक समान किया। ढुलमुल फैंसले लेने वाले मंत्रालयों में गतिशीलता उत्पन्न की। हर मंत्रालय को सख्त निर्देश दिये कि किसी भी मंत्री की मेज पर कोई फाइल आठ दिन से अधिक नहीं रुकनी चाहिए, नहीं तो कारण बताना होगा। इससे देश में बहुत तेजी से काम होने लगा। साथ ही सारे बड़े प्रोजेक्ट पी एम ओ के अंडर लिए। पुराने घोटाले वाले सारे कॉन्ट्रेक्ट निरस्त किये गये और समस्त संसाधनों की दोबारा बोली लगवाई गई। हथियारों को खरीदने के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ मेक इन इंडिया का प्रोग्राम शुरू किया। इसरो और डी आर डी ओ जैसे उत्कृष्ट संस्थानों को अतिरिक्त धन मुहैय्या कराया गया ताकि नये शोधों में बाधा न आ पाए।
अब तक देश के बड़े से लेकर छोटे तक सारे सरकारी काम बड़ी मुस्तेदी से होने लगे थे। आम जनता को इस परिवर्तन का पता नहीं था लेकिन भारत के कार्यरत विदेशी एजेंसियों की इस नये प्रधानमंत्री पर कड़ी नजर थी। वे इसकी कार्यप्रणाली की सारी रिपोर्ट अपनी सरकारों तक पहुँचा रहे थे और अब उन्हें भी समझ आ गया कि अब पहले जैसा नहीं चलने वाला। अतः उन्होंने भारत के प्रति अपनी नीतियाँ बदलने में देर नहीं की और मन ही मन नरेंद्र मोदी का सम्मान करने लगे। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि में बहुत सुधार हुआ।
कोई भी सेना हथियारों से नहीं लड़ती वह सरकार की इच्छाशक्ति से लड़ती है। डोकलाम विवाद ऐसा ही विवाद था जिसमें सभी देशों की भारत पर सभी देशों की नजर थी। वे समझ रहे थे कि देर-सवेर भारत को झुकना ही होगा। दोनों देशों के बीच 73 दिनों तक मनौवैज्ञानिक युद्ध चलता रहा लेकिन अंत में चीन को पीछे हटना पड़ा। चीन पर भारत की इस मनोवैज्ञानिक जीत से सभी शक्तिशाली देशों को मोदी के लौह संकल्प का पता चला। उनकी भारत को देखने की दृष्टि बदल गई। लेकिन सब जानते है जब तनाव शीर्ष पर था राहुल गांधी चाइनीज़ कॉन्सोलेट में चीनी अधिकारियों से चोरी से मिलने गये थे।
इन सब गम्भीर परिवर्तनों को कांग्रेस ने हल्के में लेती रही। उसकी सोच थी कि वह इंटरकेबेंसी के कारण हारी है और अगली बार वह जरूर वापसी करेगी। अतः संसद भवन में उसका व्यवहार उद्दंड बालक की तरह ही रहा। उसके अग्र पंक्ति के नेताओं ने नरेंद्र मोदी को कभी गम्भीरता से नही लिया और न ही उसकी सहयोगी पार्टियों ने भी। सबने हर मोर्चे पर उनको अपमानित किया और उनकी खिल्ली उड़ाई। लेकिन मोदी जी चुपचाप अपने मिशन में लगे रहे।
अकेला व्यक्ति कुछ नही कर सकता। एक और मोदी जी देश की अर्थव्यवस्था, रक्षा और गरीबो तक पहुँचने योजनाओं में व्यस्त थे तो दूसरी और अमित शाह और उनकी टीम प्रदेशो में होने वाले इलेक्शनों को संभाल रही थी। इस चुनाव में देशवासियों ने भाजपा की तपस्या का फल देकर उसे एक बार फिर निष्कंटक बहुमत दिया है। भाजपा के 50 प्रतिशत से अधिक वोट ने विपक्ष की चूलें हिलाकर रख दी है। उन्हें अब अपनी हार के बहाने भी नहीं मिल रहे है। देश की आंतरिक स्तिथि अब बहुत मजबूत है। मोदी जी का भाग्य भी अच्छा है। पिछली बार जब पड़ भार संभाला था तो तेल की कीमतें जो पहले 160 रूपये पर बैरल तक थी 40 तक आ गयी थी। और इस बार चीन और अमेरिका का ट्रेड वार छिड़ा हुआ है। 200 यूरोपियन और अमेरिकन कम्पनियाँ चीन को छोड़कर भारत आने की सोच रही है। उनके लिए चीन अब घाटे का सौदा बनता जा रहा है। पाकिस्तान पूरी तरह घुटनों पर आ चुका है।
चुनाव नतीजों के बाद राहुल गांधी ने अपनी विचारधारा वाले लोगो को सरकार से न डरने की सलाह दी है। उन्होंने अपने मेनिफेस्टो में देशद्रोह का कानून हटाने, कश्मीर में सेना के अधिकार कम करने और धारा 370 और 35A को नहीं हटाने के लिए कहा था। इससे विदित होता है कि उन्होंने मुसलमानों को सरकार से नही डरने को कहा है। कश्मीर और पाकिस्तान प्रेम आज भी उनके मन में हिलोर मार रहा है। इसके विपरीत मोदी जी ने अपने स्वागत भाषण में पूरे समाज को जात-पात से ऊपर दो भागों में बांट दिया है, गरीब और टेक्स देकर उनकी स्थिति सुधारने में सहायता करने वाले। इस सन्देश में हिन्दू, मुस्लिम कहीं दिखाई नहीं पड़ता।
कुछ लोग नरेंद्र मोदी पर अधिनायक, श्रेष्ठता बोध से पीड़ित, कट्टर, धुर दक्षिणपंथी, मानसिक रोगी व्यक्ति बताते है। उन्हें अपने विचारों का पुनः अवलोकन करना चाहिए। वे नहीं जानते कि नरेंद्र मोदी ने देश को कितने विशाल अन्ध विवर से बचाया है। आज देश का कम पढ़ा लिखा व्यक्ति तो मोदी जी को समझ रहा है !

ऐसी ही कई और ताजा ख़बरों को देखने के लिए कृपया यूट्यूब में हमारे चैनल rashtrabodh को भी देखिये और निशुल्क सब्सक्राइब भी कीजिये !
निचे दिए चैनल लिंक पर क्लिक करें –
https://www.youtube.com/channel/UCDjkFDU8g4ta3d_bBrsSk2w?view_as=subscriber  

राष्ट्रबोध,राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका,
मुख्य संपादक –  पवन केसवानी 

One comment

  1. Pingback: URL

Leave a Reply

Your email address will not be published.