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गरीबी और दुख में भी में भी सुदामा जी ने शुक्र मनाया….!!

रायपुर / राकेश डेंगवानी – आज बिलासपुर सरकंडा पार्वती टावर में भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के सातवें दिन में बाबा आनंद राम दरबार के श्री कृष्ण दास जी के साथ बलराम भाई एकादशी वाले ने श्री कृष्ण और सुदामा जी के मधुर चरित्र सुनाएं कहा की भक्त सुदामा जी ने महान दुखों में गरीबी में ऐसी हालत में जहां हर दिन उनको भोजन नहीं मिल पाता था उस समय वे श्रीकृष्ण का शुक्रिया करते थे धन्यवाद देते थे और बड़े प्रेम के साथ उनका गुणगान करते थे। वह कहते थे मेरे पास कुछ भी नहीं है और कुछ चाहिए भी नहीं बस मुझे तो उनकी याद चाहिए उनका प्रेम चाहिए।

श्री कृष्ण भागवत में कहते हैं कि जिससे मैं अधिक प्रेम करता हूं जिसे अपनी ओर खींचना चाहता हूं उसे मैं दुख देता हूं उसे मैं असफल भी कर देता हूं जिस तरह वह मुझे प्रेम करें मुझे याद करें और सदा सदा के लिए दुखों से जन्म मरण से छूट जाए। इसलिए भक्त सुदामा जी ने गरीबी में दुखों में भी भगवान से कुछ चाहा नहीं केवल प्रेम करता रहा लेकिन बिना कहे श्री कृष्ण ने उनके ऐसे महल बनाए की स्वर्ग के राजा इंद्र भी देखते रह गए सुदामा जिनके पास एक पैसा एक अन्न का दाना भी नहीं था उनको साक्षात श्री लक्ष्मी स्वरूपा रुकमणी जी पंखा झूल रही है और श्री कृष्ण उनके चरण दबा रहे हैं यह सुख और तीनों लोकों के खजानो से भी ऊपर की बात है। ये केवल भक्ति प्रेम से ही सम्भव है।। इस कथा से हम यह ज्ञान ले की श्रेष्ठ श्रीकृष्ण से कोई भी नाता जोड़े और सबसे सरल सखा का नाता दोस्ती का नाता उसे अपना बेस्ट फ्रेंड माने सर्वोत्तम मित्र माने और देखिए भगवान कैसे दोस्ती निभाते हैं उनसे पांच 10 मिनट बैठ कर बातें करें उनका वजूद अस्तित्व स्वीकार करें कि श्रीकृष्ण मेरे सामने हैं और बातें करते करते आपको लगेगा कि वह बड़े ध्यान से सुन रहे हैं और कभी ना कभी किसी न किसी तरह वह आपको अप्रत्यक्ष जवाब भी देंगे उत्तर भी देंगे इसलिए एक नियम बनाने के दिन में जब भी समय मिले मन से ही भगवान से बातें करें यह बहुत ऊंचे दर्जे की भक्ति है श्री कृष्ण जैसा आप को कोई मित्र नहीं मिल सकता जो जन्म से पहले अभी और संसार के बाद भी साथ देता है। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव। गोपाल दामोदर दीनदयाल दुख भंजन पूरन कृपाल। भागवत कथा में कई भक्तों ने सेवा की सबके मन में यही अभिलाषा थी कि जल्द ही फिर से श्री भागवत कथा का अमृत पान करने का अवसर मिले।

कार्यक्रम को सफल बनाने में शंकर मनचंदा ,राजू भाई, शिव भाई, दयानंद भाई ,अर्जुन भाई, श्रीमती कौशल्या , श्रीमती पार्वती , श्रीमती लक्ष्मी  ,प्रकाश चावला, ओम भाई, धीरज रोहरा, जयराम खत्री, शिव मनचंदा, विनीता भवनानी,महेश पमनानी , यश रोहरा  एवं बाबा आनंद राम सेवा समिति चक्करभाटा बिलासपुर के सभी सदस्यों का समाज के वरिष्ठ जनों का विशेष सहयोग रहा ! आखिरी दिन समापन के बाद आम भंडारे का आयोजन किया गया बड़ी संख्या में भक्तजनों ने भंडारा ग्रहण किया !

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