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उद्धव का इशारा : महाराष्ट्र में अगला सीएम हमारा….!!

मुंबई – लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव भी भाजपा-शिवसेना मिलकर लड़ने वाले हैं लेकिन शिवसेना ने साफ कर दिया है कि उसकी नजर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है। शिवसेना के स्थापना दिवस पर आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इशारों ही इशारों में मुख्यमंत्री पद को लेकर अपने इरादे को स्पष्ट कर दिया। बुधवार को सायन के षण्मुखानंद सभागार में आयोजित शिवसेना के सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री कौन बनेगा यह बात गौण है। इसके जवाब में उद्धव ने कहा कि सबकुछ एक समान चाहिए। उद्धव का इशारा ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद को लेकर था।

सम्मेलन में सबसे पहले मुख्यमंत्री ने शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इस पर मीडिया को चर्चा करने दीजिए। उद्धव और हमने सभी फैसले तय कर लिए हैं। उचित समय पर सही बात की घोषणा की जाती है। हमारा लक्ष्य विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत का होना चाहिए। मुझे विश्वास है कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा और शिवसेना गठबंधन को अक्टूबर महीने में विधानसभा चुनाव में अभूतपूर्व जीत मिलेगी। इस जीत के बाद हमें फिर से जनता की सेवा करनी है। मराठवाड़ा और पश्चिम विदर्भ को सूखा मुक्त करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम केवल एक चुनाव के लिए नहीं एकसाथ आए हैं। हम प्रदेश और देश के भले के लिए साथ में हैं। चुनाव केवल एक माध्यम है।

वहीं उद्धव ने मुख्यमंत्री से कहा कि आप भी मुझे अपने पार्टी के कार्यक्रम में बुला सकते हैं। फिर हंसते हुए कि अब सबकुछ भी एक समान होना चाहिए। उद्धव ने कहा कि शिवसेना और भाजपा के कार्यकर्ताओं को मिलकर शपथ लेनी चाहिए कि हम टूटेंगे नहीं।उद्धव ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर को डरपोक कहने वालों की लोकसभा चुनाव में हार हुई है। मुझे  खुशी और अभिमान है कि कांग्रेस की हार हुई है।

पार्टी के मुख पत्र में छपी संपादकीय में भी इशारा

पार्टी के मुख पत्र में छपी संपादकीय में कहा गया है कि ‘भाजपा के साथ गठबंधन जरूर है, लेकिन शिवसेना अपने तेवर वाला संगठन है। एक संकल्प लेकर शिवसेना आगे बढ़ी है। इसी संकल्प के आधार पर कल हम विधानसभा को ‘भगवा’ करके छोड़ेगे। शिवसेना के 54 वें स्थापना दिवस समारोह में शिवसेना का मुख्यमंत्री विराजमान होगा। चलिए यह सकल्प लेकर काम शुरु करें। संपादकीय में कहा गया है कि आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शिवसेना की तरह भूमिपूत्रों वाली नीति अपना रही हैं। दक्षिण के कई राज्य और पार्टियां क्षेत्रिय अस्मिता की राजनीति कर रही हैं। शिवसेना प्रमुख ने क्षेत्रीय अस्मिता का विचार रखा जिसे देश ने स्वीकार किया। उन्होंने हिंदुत्व का बीजारोपण किया था वे भी अंकुरित हुए।

सोमवार को होगा विप उपसभापति का चुनाव, शिवसेना को मिलेगा यह पद 

विधान परिषद में उपसभापति पद अब शिवसेना को मिलना तय हो गया है। गुरुवार को विधान परिषद में उपसभापति पद के चुनाव को लेकर घोषणा हो सकती है। इस घोषणा के साथ ही चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सोमवार को उपसभापति पद का चुनाव होने की उम्मीद है। शिवसेना की तरफ से उपसभापति पद के लिए सदन की सदस्य नीलम गोर्हे प्रमुख दावेदार हैं। गोर्हे फिलहाल सदन में शिवसेना की सचेतक हैं। प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी भाजपा ने शिवसेना को उपसभापति पद देने का फैसला किया है। शिवसेना के पास विधानसभा का उपाध्यक्ष पद भी है। दरअसल विधान परिषद में विपक्षी दलों का बहुमत है। इस लिए विधान परिषद सभापति पद राकांपा के पास है। विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखेपाटील अब सरकार में मंत्री बन चुके हैं। इस लिए कांग्रेस ने अब विधानसभा में विपक्ष के नेता पद के लिए विजय वड्‌टीवार को चुना है लेकिन सत्ता पक्ष ने विधानसभा में विपक्ष का नेता पद देने के लिए विधान परिषद में उपसभापति का पद देने की शर्त रखी थी। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस-राकांपा द्वारा सत्ता पक्ष की यह शर्ते मानने के बाद अब विधान परिषद के उपसभापति के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है।

महामंडल संचालक पद पर नियुक्ति का इंतजार, शिवसेना पदाधिकारियों में निराशा

उधर खबर नागपुर से, कई विकास महामंडलों के अध्यक्ष नियुक्त किए हैं। लेकिन संचालकों के नाम सामने के आने के बाद भी उनकी नियुक्तियां नहीं हो पायी है। सूत्र के अनुसार महामंडलों पर नियुक्तियां राजनीतिक समायाेजन की रणनीति के तहत होना है। शिवसेना के साथ संबंध सुधारने के लिए भाजपा ने लोकसभा चुनाव के पहले संचालक पद के लिए सूची तो तैयार कर ली लेकिन बाद में विषय को लंबित रख दिया गया। राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटील की भूमिका महामंडल मामले में सबसे महत्वपूर्ण बताया जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ महामंडलों में उपाध्यक्ष पद के लिए शिवसेना ने दावा किया है। लेकिन भाजपा उपाध्यक्ष पद नहीं देना चाहती है। महाराष्ट्र गृहनिर्माण विकास महामंडल के मामले में भी यही स्थिति है। संचालकों में शिवसेना पदाधिकारियों का नाम प्रमुखता से शामिल है। ऐसे में पदाधिकारियों में निराशा की स्थिति बनी हुई है। सत्ता पक्ष की ओर से केवल आश्वासन मिल रहा है कि नियुक्तियों की अधिसूचना जल्द जारी हो जाएगी। गौरतलब है कि महामंडलों में नियुक्ति को लेकर निराशा का मामला विदर्भ विकास वैधानिक महामंडल के माध्यम से सामने आया। राज्यपाल के निर्देश पर इस महामंडल के माध्यम से विकास कार्य कराए जाते हैं। लेकिन लंबे समय से इस महामंडल में अध्यक्ष पद को लेकर निराशा का माहौल रहा है। भाजपा विधायक चैनसुख संचेती को 12 जून 2018 को इस महामंडल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। लेकिन एक साल बाद 17 जून को उन्होंने पदग्रहण किया। चर्चा है कि संचेती राज्य मंत्रिमंडल में केबिनेट मंत्री पद चाहते थे।

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